Sunday, July 26, 2026
Home Blog अंगिरा I Dr.Sumit Srivastav I Navonmesh

अंगिरा I Dr.Sumit Srivastav I Navonmesh

नाटक : अंगिरा
लेखक : डॉ. गौतम चैटर्जी
निर्देशक : डॉ.सुमित श्रीवास्तव
प्रस्तुति : नवोन्मेष
प्रस्तुति दिनाँक : 5 मार्च 2023
स्थान : थ्रस्ट प्रेक्षागृह, भारतेन्दु नाट्य अकादमी, लखनऊ

A scene from play ‘Angira’ I Navonmesh


पात्र :
मोइज़ : राज वर्धन पांडेय
अंगीरा : भव्या द्विवेदी

सहायक निदेशक : अविजित पाण्डेय
संगीत : तुषार गुप्ता
प्रोडक्शन मैनेजर : राहुल सिंह चंदेल

A scene from play ‘Angira’ I Navonmesh

नाटक सार :
नायक मोइज़ और नायिका अंगीरा मुम्बई के महानगर में एक कमरा कॉन्ट्रैक्ट पर लेकर रहते हैं, शर्त के मुताबिक मोइज़ रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक रहता है और सुबह प्रेस में नौकरी करने चला जाता है। अंगीरा आकाशवाणी में नौकरी करती है, वहाँ उसका काम रात में होता है। वो दिन भर कमरे में रहती है और रात को नौकरी करने चली जाती है लेकिन एक दिन वो नौकरी पर नहीं जाती है। मोइज़ के पूछने पर वो बताती है कि उसने एक मर्डर किया है ,यही से नाटक अपने क्लाइमेक्स की तरफ मुड़ जाता है और सुखांत में तब्दील होता है। भारतीय मानस में हर कालखंड में लड़कियां किस मानसिक दबाव से गुज़रती हैं या गुज़रती रही हैं चाहे वो गार्गी, मैत्रेयी, अपाला, लोपामुद्रा, पंचकन्या, या द्रौपदी ही क्यों न हो! इन सभी की मानसिकता और अंतर्द्वंद की छाया है अंगीरा, जो कि अबतक हुई सभी स्त्रियों का प्रतिनिधित्व करती है। मोइज़ अंगीरा को सुनता हुआ उसके मन की गहराइयों को समझता है और अंगीरा को अहसास होता है कि उसके शब्द मोइज़ की लिखावट का ही हिस्सा हैं … इस बार दोनों एक ही शब्द लिखना चाहते हैं एक साथ एक मन से….ये एक physiological love story है, बहुत ही subtle .जो दर्शकों से प्रस्तुति के लिए उसी गहराई और सहृदयता की मांग करती है।

A scene from play ‘Angira’ I Navonmesh
A scene from play ‘Angira’ I Navonmesh
A scene from play ‘Angira’ I Navonmesh

Play : Angira
Writer : Dr.Gautam Chatterjee
Director : Dr.Sumit Srivastav
Created by : Navonmesh

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

डॉक्टर से IPS बनने की प्रेरक कहानी : IPS Arpit Jain की UPSC journey | Vijit Singh

Can a doctor become an IPS officer? The answer is a resounding yes, and the inspiring journey of IPS Arpit Jain proves that determination, purpose, and...

ऑफिस से घर लौटी स्त्री I Hindi Kavita I Rajesh Joshi I Vijit Singh

Office Se Ghar Lauti Stree I ऑफिस से घर लौटी स्त्री Written by : Rajesh Joshi I कवि : राजेश जोशी Poetry...

बहन की विदाई I Hindi Kavita I Rajesh Joshi I Vijit Singh

“Bahan Ki Vidayi (बहन की विदाई)” is not just a poem - it is an emotional experience deeply rooted in Indian culture....

मुस्कुराकर चल मुसाफ़िर I Hindi Kavita I Gopal Das Neeraj I Vijit Singh

Muskurakar Chal Musafir I मुस्कुराकर चल मुसाफ़िर … Written by Gopaldas Neeraj I कवि : गोपालदास नीरज Recited by Vijit Singh...

Recent Comments